Wednesday, 18 April 2012

नालंदा विश्वविद्यालय [बिहार]

बिहार का ऐतिहासिक नाम मगध है,बिहार का नाम 'बौद्ध विहारों' शब्द का विकृत रूप माना जाता है, इस की राजधानी पटना है जिसका पुराना नाम पाटलीपुत्र था.!
आज आप को एक ऐसे दर्शनीय जगह लिए चलते हैं जिसके बारे में बहुत लोग जानते हैं.-

बिहार में एक जिला है नालंदा...संस्कृत में नालंदा का अर्थ होता है “ज्ञान देने वाला” (नालम = कमल, जो ज्ञान का प्रतीक है; दा = देना).

कहते हैं कि इस की स्थापना ४७० ई./४५० ई.[?] में गुप्त साम्राज्य के राजा कुमारगुप्त ने की थी। यह विश्व के प्रथम पूर्णतः आवासीय विश्वविद्यालयों में से एक था जहां १०,००० छात्र और २,००० शिक्षक रहते थे।

नालंदा विश्वविद्यालय में विद्यार्थी विज्ञान, खगोलशास्त्र, चिकित्सा, तर्कशास्त्र, गणित, दर्शन, तथा हिन्दु और बौद्ध धर्मों का अध्ययन करते थे। चौथी से सातवीं ईसवी सदी के बीच नालंदा का उत्कर्ष हुआ।

अध्ययन करने के लिए चीन, जापान, कोरिया, तिब्बत, इंडोनेशिया, इरान और तुर्की आदि देशो से विद्यार्थी आते थे। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेन्सांग ने भी ईस्वी सन् ६२९ से ६४५ तक यहां अध्ययन किया था तथा अपनी यात्रा वृतान्तों में उसने इसका विस्तृत वर्णन किया है। सन् ६७२ ईस्वी में चीनी इत्सिंग ने यहाँ शिक्षा प्राप्त की।कहा जाता है कि नालंदा विश्वविध्यालय में चालीस हजार पांडुलिपियों सहित अन्य हजारों दुर्लभ हस्त लिखित पुस्तकें थी !

खगोलशास्त्र के अध्ययन के लिए एक विशेष विभाग था। एक प्राचीन श्लोक के अनुसार आर्यभट नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति भी थे। आर्यभट के लिखे तीन ग्रंथों की जानकारी आज भी उपलब्ध है। दशगीतिका, आर्यभट्टीय और तंत्र।

यहाँ के तीन बड़े बड़े पुस्तकालय के नाम थे -:

1. रत्न सागर 2. विढ्ध्यासागर 3. ग्रंथागार

११९३ में तुर्क मुस्लिम सेनापतिबख्तियार खिलज़ी ने बिहार पर आक्रमण किया। जब वह नालंदा पहुंचा तो उसने नालंदा विश्वविद्यालय के शिक्षकों से पूछा कि यहां पवित्र ग्रन्थ कुरान है या नहीं। जवाब नहीं में मिलने पर उसने नालंदा विश्वविद्यालय को तहस नहस कर दिया और पुस्तकालय में आग लगा दी। कहते हैं यह ६ माह तक जलती रही और आक्रांता इस अग्नि में नहाने का पानी गर्म करते थे.

ये कहा जाता है की ऋषि मुनियों द्वारा किये सभी शोध इन पुस्तकालयों में सुरक्षित थी जो आज हम टेक्नोलोजी देख रहे है वो पहले है बन चुकी थी ! आज भी पुष्पक विमान बन सकता है जिसकी सरचना रावण संहिता में दिया गयी है ! और सभी चिकित्सा के शोध भी !

आप अंदाज लगा सकते है कि जब आग लगाई गयी तो ६ महीनो तक जलती रही तो कितनी शोध और ग्रन्थ जले होंगे ! पिछली पोस्ट में मेने जो ऋषियों के बारे बताया है वो सभी इन पुस्तकालयों में सुरक्षित था !